मुझे ले चल मेरे प्रिय,
तू अपने संसार में।
यह जग झूठा है,
नही रहना इसके प्यार में।।
मुझे ले चल मेरे प्रिय,
जहाँ कोइ मेरा नाम ना पूछे,
हो ऐसा मानव अभिसार।
जहाँ कोइ पहचान ना पूछे,
हो ऐसा सुन्दर संसार।।
मुझे ले चल मेरे प्रिय,
मुझे घुट-घुट के नही जीना है,
मुझे मर-मर के नही मरना है।
मै आज़ादी का पंक्षी हूँ,
आकाश को छोटा करना है।।
मुझे ले चल मेरे प्रिय,
छोड़ा है राजधरा को अपने,
किसी अल्हड़ राजकुँवर ने।
पहचान दिला दे तू इसको,
मदोन्मत्त बाहों की शरण मे।।
मुझे ले चल मेरे प्रिय,
तेरे सिवा मेरा कौन है,
इस घृणित संसार मे।
समझे ना मेेरी बात को पगली,
क्या रखा इस धिक्कार में।।
मुझे ले चल मेरे प्रिय ,,,
-नदीम जहीर खान
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