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Wednesday, 4 June 2014

समर्पित


तन समर्पित मन समर्पित,
और ये यौवन समर्पित।
है पवित्रता को तेरे,
ये मेरा जीवन समर्पित।।

धमनी में प्रवाह जो है,
रक्त का कण-कण समर्पित।
सर तेरा झुकने से प्रथम,
श्वास का अंकन समर्पित।।

वीरों की धरती के पथ पर,
है मेरा पग-पग समर्पित।
अंग तो सब तुच्छ हैं,
ये आत्मा रग-रग समर्पित।।

गोद में तेरी पला मैं,
करता शत् यौवन समर्पित।
हृदय में माँ गंगा-सी तुम हो,
भगीरथ प्रतिपल समर्पित।।

मातृभूमि के मुख पे एक मुस्कान लाने के लिए,
मैं समर्पित मैं समर्पित मैं समर्पित।
स्वर्ग जैसे इस धरा मैं समाने के लिए,
मैं समर्पित मैं समर्पित मैं समर्पित।।

: नदीम ज़हीर ख़ान

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